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Home / साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के दक्षिण एशियाई भाषा एवं संस्कृति केंद्र द्वारा तीन अध्ययन सामग्री—प्रारंभिक संस्कृत भाषा परिचय, दक्षिण एशियाई भाषाओं.. 15

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साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के दक्षिण एशियाई भाषा एवं संस्कृति केंद्र द्वारा निम्नलिखित अध्ययन सामग्री/पुस्तकों का सफलतापूर्वक लोकार्पण किया गया:• प्रारंभिक संस्कृत भाषा परिचय (हिंदी/अंग्रेज़ी) • दक्षिण एशियाई भाषाओं का अन्त: सम्बन्ध (हिंदी/अंग्रेज़ी) • दक्षिण एशिया में वैज्ञानिक एवं प्रौघोगिकीय परिदर्शन (हिंदी/अंग्रेज़ी)इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल भाई कोठारी उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के माननीय अध्यक्ष प्रो. के. के. अग्रवाल ने की।इन पुस्तकों का लेखन प्रो. विजय कुमार कर्ण (नवा नालंदा महाविहार, नालंदा, पटना), प्रो. चंद किरण सलूजा (संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान, नई दिल्ली), प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज (दिल्ली विश्वविद्यालय), प्रो. कामेश्वर शुक्ला (गुवाहाटी विश्वविद्यालय, असम) तथा डॉ. बिपिन कुमार झा (बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ) द्वारा किया गया है।अपने संबोधन में माननीय अध्यक्ष प्रो. के. के. अग्रवाल ने दक्षिण एशियाई भाषा एवं संस्कृति केंद्र की स्थापना, उसकी यात्रा तथा SAARC देशों के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करने में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।मुख्य अतिथि डॉ. अतुल भाई कोठारी ने प्रकाशन कार्य से जुड़े सभी सदस्यों को बधाई देते हुए भाषा और संस्कृति के महत्व पर बल दिया। उन्होंने योग की वैश्विक स्वीकृति का उल्लेख करते हुए उसके भारतीय मूल को रेखांकित किया तथा “भारत” शब्द के अर्थ और भारतीय सभ्यता की समृद्ध विरासत पर अपने विचार साझा किए।कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के उपाध्यक्षगण, संकाय सदस्य तथा प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। यह आयोजन साउथ एशियन यूनिवर्सिटी की भाषाई विविधता, सांस्कृतिक समझ और SAARC क्षेत्र में शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करता है।